Cash Flow Management: छोटे बिज़नेस के लिए 5 सबसे आसान तरीके (रोकड़ा हाथ में कैसे रखें)

जब कोई नया बिज़नेस, दुकान या छोटा उद्योग शुरू करता है, तो शुरुआत में सबसे बड़ी परेशानी पैसों को लेकर होती है। कई लोग कहते हैं कि बिक्री तो हो रही है, फिर भी जेब खाली रहती है। महीने के आखिर में किराया, बिजली का बिल, सैलरी और माल का पैसा देना मुश्किल लगने लगता है। यही समस्या असल में Cash Flow की होती है।

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Cash Flow का मतलब सिर्फ पैसा कमाना नहीं, बल्कि यह देखना होता है कि पैसा कब आ रहा है और कब जा रहा है। बहुत से छोटे बिज़नेस इसलिए परेशान होते हैं क्योंकि पैसा फँस जाता है। कभी उधार में, कभी स्टॉक में, और कभी बिना सोचे खर्च हो जाता है।

इस आर्टिकल में हम Cash Flow Management के 5 सबसे आसान तरीके समझेंगे। ये तरीके ऐसे हैं जिन्हें कोई भी दुकानदार, नया व्यापारी या छोटा उद्योग चलाने वाला बिना किसी बड़ी पढ़ाई के अपनाकर अपना रोकड़ा हाथ में रख सकता है।

Cash Flow क्या है? (Profit से अलग क्यों?)

Cash Flow का मतलब होता है कि आपके बिज़नेस में पैसा कब आ रहा है और कब बाहर जा रहा है। यानी हाथ में कितनी नकदी बच रही है। बहुत से लोग Cash Flow और Profit को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों अलग बातें हैं।

Profit तब दिखता है जब आप कागज पर हिसाब लगाते हैं। लेकिन Cash Flow तब सही माना जाता है जब सच में पैसा आपके पास मौजूद हो। कई बार बिज़नेस मुनाफे में होता है, फिर भी दुकानदार के पास रोकड़ा नहीं होता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पैसा उधार में फँसा रहता है, स्टॉक में लगा होता है या पहले ही खर्च हो जाता है। 

मान लीजिए आपने कुल 50 हजार की बिक्री की, लेकिन ग्राहक ने उधार ले लिया। कागज पर Profit दिखेगा, लेकिन हाथ में पैसा नहीं आएगा। यही Cash Flow की असली समस्या है।

तरीका 1: Cash In-Cash Out का सही बैलेंस कैसे बनाएं?

छोटे बिज़नेस में Cash Flow बिगड़ने की सबसे बड़ी वजह होती है आने वाला और जाने वाला पैसा आपस में मेल नहीं खाता। कभी कभी पैसा देर से आता है और खर्च पहले हो जाता है। 

Cash In मतलब वह पैसा जो बिक्री, ग्राहक या किसी और स्रोत से आपके पास आता है। Cash Out मतलब वह पैसा जो किराया, बिजली, माल, सैलरी और दूसरे खर्चों में चला जाता है। जब Cash Out तेज होता है और Cash In धीमा, तब असली समस्या शुरू होती है।

अक्सर दुकानदार रोज़ की बिक्री तो देखते हैं, लेकिन रोज़ का खर्च नहीं गिनते। महीने के आखिर में पता चलता है कि पैसा कहाँ चला गया। इसलिए जरूरी है कि रोज़ आने और जाने वाले पैसों पर नजर रखी जाए। सबसे आसान तरीका है की रोज़ के रोज़ अब कितना सामान बिना कितना पैसा, आया प्रॉफिट कितना हुआ, किसने कितना उधार लिया और कहाँ कितना खर्च उसका हिसाब किया जाए। 

आगे हम समझेंगे कि ये  संतुलन कैसे बिगड़ता है और इसे आसान तरीके से कैसे संभाला जा सकता है।

Cash In और Cash Out क्या होता है?

Cash In वह पैसा होता है जो आपके बिज़नेस में अंदर आता है। जैसे दुकान पर हुई बिक्री, ग्राहक से मिला भुगतान या कोई पुराना उधार वापस आना। जब भी ग्राहक पैसे देता है और वह पैसा आपके हाथ में या खाते में आता है, उसे Cash In कहा जाता है।

Cash Out वह पैसा होता है जो बिज़नेस से बाहर जाता है। इसमें माल खरीदने का पैसा, किराया, बिजली का बिल, सैलरी, ट्रांसपोर्ट और रोज़ के छोटे बड़े खर्च शामिल होते हैं। ये खर्च अक्सर तय समय पर निकल जाते हैं, चाहे बिक्री हुई हो या नहीं।

समस्या तब आती है जब Cash Out लगातार चलता रहता है, लेकिन Cash In समय पर नहीं आता। उदाहरण के लिए ग्राहक उधार ले लेता है, लेकिन किराया और बिजली का बिल तय तारीख पर देना ही पड़ता है।

रोज़ के Cash Flow में गैप क्यों आ जाता है?

रोज़ के Cash Flow में गैप तब आता है जब पैसा आने और जाने का समय अलग अलग हो जाता है। छोटे बिज़नेस में यह बहुत आम बात है। खर्च रोज़ होते हैं, लेकिन पैसा हर रोज़ हाथ में नहीं आता।

कई बार दुकानदार रोज़ की बिक्री तो गिनता है, लेकिन रोज़ के छोटे खर्चों को ध्यान में नहीं रखता। चाय, आने जाने का खर्च, छोटा मोटा सामान, ये सब मिलकर बड़ा खर्च बना देते हैं।

स्टॉक ज़्यादा खरीद लेना भी Cash Flow में गैप लाता है। पैसा माल में फँस जाता है और हाथ में नकदी कम बचती है। जब खर्च सामने आते हैं, तब दिक्कत शुरू होती है।

Cash Balance बिगड़ने के 4 बड़े कारण

छोटे बिज़नेस में Cash Balance बिगड़ने के कुछ आम कारण होते हैं, जिन पर अक्सर ध्यान नहीं जाता। 

  1. ज़्यादा उधार देना। जब ग्राहक समय पर पैसा नहीं देता, तो बिक्री होने के बाद भी हाथ में नकदी नहीं रहती।
  2. बिना सोचे समझे स्टॉक खरीदना। ज़्यादा माल लेने से पैसा स्टॉक में फँस जाता है और रोज़ के खर्च निकालना मुश्किल हो जाता है।
  3. रोज़ के छोटे खर्चों पर ध्यान न देना। चाय, आने जाने का खर्च, छोटी मरम्मत या फालतू खर्च मिलकर Cash Balance बिगाड़ देते हैं।
  4. Cash का हिसाब न रखना। जब यह पता ही नहीं होता कि पैसा कहाँ से आया और कहाँ गया, तब Cash Flow बिगड़ना तय है।

Cash In Out कंट्रोल करने का तरीका

Cash In Out कंट्रोल करने के लिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि पैसा रोज़ कहाँ से आ रहा है और कहाँ जा रहा है। इसके लिए किसी बड़ी किताब या कंप्यूटर की जरूरत नहीं है। एक साधारण कॉपी में रोज़ की बिक्री और रोज़ के खर्च लिखना ही काफी है।

दूसरा तरीका है कि रोज़ के खर्च को दो हिस्सों में बाँट दें। एक जरूरी खर्च जैसे किराया, बिजली और माल। दूसरा गैर जरूरी खर्च जैसे बेवजह की खरीदारी या फालतू खर्च। गैर जरूरी खर्च को कम करने से हाथ में पैसा बचने लगता है।

तीसरी बात यह है कि जो पैसा आज आना चाहिए, उसे आज ही लाने की कोशिश करें। उधार कम रखें और जो उधार है, उसका हिसाब साफ रखें। हर ग्राहक को यह पता होना चाहिए कि पैसा कब देना है।

चौथा तरीका है कि दिन खत्म होने पर यह देखें कि हाथ में कितना पैसा बचा। अगर रोज़ थोड़ा बहुत पैसा बचने लगे, तो Cash In Out अपने आप कंट्रोल में आने लगता है।

तरीका 2: उधार देना और Payment Delay को कैसे रोकें?

छोटे बिज़नेस में Cash Flow बिगड़ने की सबसे बड़ी वजह उधार और देर से मिलने वाला पैसा होता है। दुकान पर सामान तो रोज़ बिकता है, लेकिन जब ग्राहक पैसे बाद में देता है, तब हाथ में रोकड़ा नहीं बचता। 

कई दुकानदार पहचान या शर्म की वजह से उधार देने से मना नहीं कर पाते। शुरुआत में यह ठीक लगता है, लेकिन धीरे धीरे उधार बढ़ता जाता है और Cash Flow कमजोर हो जाता है। Payment Delay का असर सिर्फ आज पर नहीं, आने वाले दिनों पर भी पड़ता है।

इसलिए उधार को पूरी तरह खत्म करना जरूरी नहीं है, लेकिन उसे नियंत्रण में रखना बहुत जरूरी है। साफ नियम, सही ग्राहक और समय पर पैसा वसूल करने की आदत से यह समस्या काफी हद तक सुलझ जाती है।

छोटे दुकानदारों के लिए Payment के पक्के नियम

छोटे बिज़नेस में उधार पूरी तरह बंद करना हर बार संभव नहीं होता, लेकिन उसके लिए कुछ पक्के नियम बनाना बहुत जरूरी होता है। 

  • हर ग्राहक को साफ बताया जाए कि उधार कितने दिनों का है। बिना तारीख बताए दिया गया उधार अक्सर वापस नहीं आता।
  • उधार लिखित में होना चाहिए। एक कॉपी में ग्राहक का नाम, तारीख और रकम लिखने से दोनों तरफ साफ रहता है। सिर्फ याददाश्त के भरोसे उधार रखने से झगड़ा और नुकसान होता है।
  • पुराने उधार चुकाए बिना नया उधार न दें । इससे ग्राहक भी जिम्मेदारी समझता है और Cash Flow पर दबाव कम पड़ता है।
  • तय तारीख आने पर पैसे की याद दिलाई जाए। समय पर बात करने से Payment Delay की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है।

किस ग्राहक को उधार दे सकते हैं?

हर ग्राहक को उधार देना छोटे बिज़नेस के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए यह तय करना जरूरी है कि उधार किसे दिया जाए और किसे नहीं। सबसे पहले उन ग्राहकों को देखें जो लंबे समय से आपसे खरीद रहे हैं और जिनका भुगतान करने का रिकॉर्ड ठीक रहा है। ऐसे ग्राहक भरोसेमंद माने जा सकते हैं।

दूसरी बात यह देखें कि ग्राहक उधार लेने के बाद समय पर पैसा लौटाता है या बार बार बहाना बनाता है। जो ग्राहक तारीख पूछे बिना ही भुगतान कर देता है, उसे सीमित उधार दिया जा सकता है।

नए या कभी कभी आने वाले ग्राहकों को उधार देने से बचना चाहिए। ऐसे मामलों में पहले नकद या डिजिटल भुगतान लेना ज्यादा सुरक्षित रहता है।

इसके अलावा रिश्तेदारी या जान पहचान के नाम पर भी बिना सोचे उधार नहीं देना चाहिए। बिज़नेस में भावना से ज्यादा समझदारी काम आती है। सही ग्राहक चुनने से उधार नियंत्रण में रहता है और Cash Flow भी सुरक्षित बना रहता है।

उधार की लिमिट कैसे सेट करें?

उधार की लिमिट तय करना बहुत जरूरी है, ताकि बिज़नेस का पैसा पूरी तरह फँस न जाए। बिना लिमिट के दिया गया उधार धीरे धीरे बड़ा रूप ले लेता है और Cash Flow कमजोर कर देता है। इसलिए हर ग्राहक के लिए एक साफ सीमा तय करनी चाहिए।

सबसे पहले यह देखें कि आपकी रोज़ की बिक्री और खर्च कितने हैं। उसी हिसाब से तय करें कि एक ग्राहक को कितना उधार दिया जा सकता है। उदाहरण के लिए अगर रोज़ की बिक्री 5 हजार है, तो किसी एक ग्राहक को 10 या 15 हजार से ज्यादा उधार देना ठीक नहीं रहता।

दूसरी बात यह कि उधार की लिमिट सभी के लिए एक जैसी न रखें। पुराने और भरोसेमंद ग्राहक के लिए लिमिट थोड़ी ज्यादा हो सकती है, लेकिन नए ग्राहक के लिए बहुत कम या बिल्कुल नहीं।

तीसरी बात यह है कि लिमिट पूरी होने के बाद साफ मना करना सीखें। साफ शब्दों में मना करने से रिश्ते भी खराब नहीं होते और बिज़नेस भी सुरक्षित रहता है।

Cash Sale और Digital Payment पर क्यों ध्यान दें?

Cash Sale और Digital Payment पर ध्यान देने से बिज़नेस में पैसा समय पर आता है। जब ग्राहक तुरंत भुगतान करता है, तो Cash Flow अपने आप बेहतर हो जाता है। उधार की तुलना में नकद या डिजिटल भुगतान ज्यादा सुरक्षित होता है।

आज के समय में UPI, QR Code और मोबाइल बैंकिंग की वजह से पैसे लेना आसान हो गया है। ग्राहक के पास नकद न हो, तब भी डिजिटल तरीके से तुरंत भुगतान हो सकता है। इससे उधार देने की जरूरत कम पड़ती है।

Cash Sale का एक फायदा यह भी है कि रोज़ का हिसाब साफ रहता है। कितना पैसा आया और कितना खर्च हुआ, यह उसी दिन समझ में आ जाता है।

डिजिटल Payment से चोरी या गिनती की गलती का डर भी कम होता है। अगर ज़्यादातर बिक्री Cash या Digital Payment में हो, तो बिज़नेस का पैसा हाथ में रहता है और Cash Flow मजबूत बना रहता है।

तरीका 3: Stock और Inventory को कैसे मैनेज करें?

छोटे बिज़नेस में Cash Flow फँसने की एक बड़ी वजह स्टॉक होती है। कई बार दुकानदार ज़्यादा माल इस सोच में ले लेता है कि आगे काम आ जाएगा, लेकिन वही माल पैसे को रोक देता है। कागज पर माल दिखता रहता है, पर हाथ में नकदी नहीं बचती।

Stock का मतलब सिर्फ माल रखना नहीं होता, बल्कि सही समय पर सही मात्रा में माल रखना होता है। ज़्यादा स्टॉक लेने से पैसा गोदाम या दुकान की अलमारी में बंद हो जाता है। दूसरी तरफ बहुत कम स्टॉक रखने से बिक्री रुक सकती है। इसलिए संतुलन बहुत जरूरी है।

Inventory मैनेजमेंट का आसान मतलब यह है कि कौन सा माल जल्दी बिक रहा है, कौन सा धीरे बिक रहा है और कौन सा बिल्कुल नहीं बिक रहा। अगर यह समझ बन जाए, तो पैसा बेवजह नहीं फँसता।

आगे हम समझेंगे कि स्टॉक कैसे Cash Flow को रोकता है, सही मात्रा कैसे तय करें और जो माल नहीं बिक रहा उससे कैसे छुटकारा पाएं।

ज़्यादा स्टॉक लेने से बिज़नेस का पैसा क्यों ब्लॉक होता है?

जब कोई दुकानदार ज़रूरत से ज़्यादा स्टॉक खरीद लेता है, तो उसका पैसा माल में फँस जाता है। माल दुकान या गोदाम में पड़ा रहता है, लेकिन वह पैसा रोज़ के खर्च निकालने के काम नहीं आता। बाहर से देखने पर लगता है कि बिज़नेस में माल बहुत है, लेकिन अंदर से नकदी की कमी रहती है।

अक्सर ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दुकानदार छूट के लालच में ज़्यादा माल उठा लेता है या भविष्य की बिक्री का अंदाज़ा सही नहीं लगा पाता। धीरे धीरे यह माल बिकने में समय लेता है और Cash Flow रुक जाता है।

ज़्यादा स्टॉक का एक और नुकसान ये भी है कि खराब होने, टूटने या फैशन बदलने का खतरा बढ़ जाता है। इससे नुकसान और भी बढ़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि स्टॉक उतना ही लिया जाए जितना जल्दी बिक सके। सही मात्रा में लिया गया स्टॉक ही Cash Flow को चालू रखता है।

Slow Moving और Dead Stock क्या होता है?

Slow Moving Stock वह माल होता है जो बिक तो रहा है, लेकिन बहुत धीरे। यह महीनों तक दुकान में पड़ा रहता है और पैसा रोककर रखता है। दूसरी तरफ Dead Stock वह माल होता है जो बिल्कुल नहीं बिक रहा। न ग्राहक पूछता है, न उसकी मांग रहती है।

Slow Moving और Dead Stock दोनों ही एक तरह से Cash Flow के दुश्मन होते हैं। छोटे बिज़नेस में जरूरी है कि समय समय पर यह देखा जाए कि कौन सा माल चल रहा है और कौन सा सिर्फ जगह घेर रहा है। 

सही मात्रा में स्टॉक कैसे रखें?

सही मात्रा में स्टॉक रखने का मतलब है इतना माल रखना जितना जल्दी बिक सके। बहुत ज़्यादा स्टॉक लेने से पैसा फँसता है और बहुत कम लेने से बिक्री रुक जाती है। इसलिए संतुलन जरूरी होता है।

इसके लिए पहले यह देखें कि रोज़ या हफ्ते में कौन सा माल कितना बिक रहा है। उसी हिसाब से अगली खरीद करें। जो सामान हर दिन बिकता है, उसका स्टॉक थोड़ा ज्यादा रखा जा सकता है, लेकिन जो कभी कभी बिकता है, उसे सीमित मात्रा में ही लेना ठीक रहता है।

नए बिज़नेस में धीरे धीरे स्टॉक बढ़ाना ज्यादा सुरक्षित रहता है। इससे Cash Flow भी ठीक रहता है और नुकसान का खतरा भी कम होता है।

स्टॉक खरीदने से पहले पैसे की स्थिति कैसे देखें?

स्टॉक खरीदने से पहले यह देखना बहुत जरूरी है कि आपके पास कितना पैसा मौजूद है। कई दुकानदार सिर्फ यह देखते हैं कि माल सस्ता मिल रहा है या छूट मिल रही है, लेकिन यह नहीं देखते कि हाथ में नकदी कितनी है।

स्टॉक खरीदते समय यह सोचें कि खरीद के बाद भी किराया, बिजली और रोज़ के दूसरे खर्च निकालने के लिए पैसा बचेगा या नहीं। अगर सारा पैसा स्टॉक में लग जाएगा, तो Cash Flow पर दबाव आ जाएगा।

अच्छा तरीका यह है कि पहले तय कर लें कि कुल पैसे का कितना हिस्सा स्टॉक में लगाना है और कितना हाथ में रखना है। इससे खरीद के बाद भी बिज़नेस आराम से चलता रहता है।

बिके बिना पड़े माल (Dead Stock) से छुटकारा कैसे पाएं?

Dead Stock वह माल होता है जो लंबे समय से पड़ा रहता है और बिकता नहीं। ऐसा माल Cash Flow को रोककर रखता है, इसलिए उसे जल्दी पहचानना जरूरी होता है।

इससे छुटकारा पाने के लिए सबसे पहले उस माल को अलग रखें और देखें कि कितने समय से वह नहीं बिका। ऐसे माल पर छूट देकर या ऑफर बनाकर निकालना बेहतर रहता है, भले ही मुनाफा कम मिले। कुछ मामलों में उस माल को किसी दूसरे दुकानदार को कम दाम पर देना भी सही रहता है।

तरीका 4: हर महीने के Fixed खर्चों (किराया, सैलरी) की प्लानिंग कैसे करें?

हर छोटे बिज़नेस में कुछ खर्च ऐसे होते हैं जो हर महीने तय रहते हैं। इनमें दुकान या गोदाम का किराया, बिजली का बिल, कर्मचारियों की सैलरी, मोबाइल और इंटरनेट का खर्च शामिल होता है। चाहे उस महीने बिक्री कम हो या ज्यादा, ये खर्च समय पर देने ही पड़ते हैं।

अक्सर नया बिज़नेस शुरू करने वाले लोग इसी जगह गलती कर बैठते हैं। महीने की शुरुआत में जो पैसा आता है, वह रोज़मर्रा के खर्चों में धीरे धीरे निकल जाता है। जब किराया या सैलरी देने का समय आता है, तब हाथ में पैसा कम पड़ जाता है और तनाव बढ़ जाता है।

इससे बचने के लिए सबसे सही तरीका यह है कि महीने की शुरुआत में ही Fixed खर्चों की पूरी लिस्ट बना ली जाए। जैसे ही बिक्री से पैसा आए, उसका एक हिस्सा सबसे पहले इन खर्चों के लिए अलग रख दिया जाए। इससे बाकी पैसा इस्तेमाल करते समय अंदाज़ा रहता है कि कितना खर्च किया जा सकता है।

जब Fixed खर्च पहले से प्लान रहते हैं, तो Cash Flow ज्यादा स्थिर रहता है और बिज़नेस बिना दबाव के चलता है।

तरीका 5: इमरजेंसी फंड या Buffer Cash कैसे बनाएं?

छोटे बिज़नेस में अचानक खर्च आना बहुत आम बात है। कभी मशीन खराब हो जाती है, कभी माल खराब निकल आता है, कभी ग्राहक पैसा देर से देता है या अचानक बिक्री कम हो जाती है। ऐसे समय में अगर हाथ में पैसा न हो, तो पूरा बिज़नेस हिल जाता है। इसी समस्या से बचाने के लिए इमरजेंसी फंड या Buffer Cash बहुत जरूरी होता है।

Buffer Cash का मतलब होता है ऐसा पैसा जो रोज़ के खर्च के लिए नहीं, बल्कि मुश्किल समय के लिए अलग रखा जाता है। यह पैसा बिज़नेस को सहारा देता है जब Cash Flow अचानक कमजोर पड़ जाता है।

छोटे दुकानदार या नया बिज़नेस शुरू करने वाले लोगों के लिए बहुत बड़ा फंड बनाना जरूरी नहीं है। शुरुआत में इतना Buffer Cash काफी होता है जिससे कम से कम एक महीने के जरूरी खर्च निकल सकें। जैसे किराया, बिजली और सैलरी।

जैसे हमें पहले बात की कि Buffer Cash बनाने का आसान तरीका है। हर महीने की कमाई से थोड़ा थोड़ा पैसा अलग रखा जाए। भले ही रकम छोटी हो, लेकिन धीरे धीरे यह एक मजबूत सहारा बन जाती है। जब बिज़नेस के पास Buffer Cash होता है, तो मुश्किल समय में भी काम बिना घबराहट के चलता रहता है।

सबसे बड़ी गलतियाँ जो Small Business Cash Flow में करते हैं

  1. बिक्री ज़्यादा होने पर यह मान लेना कि Cash Flow भी ठीक है।
  2. ज़रूरत से ज़्यादा उधार दे देना और वसूली पर ध्यान न देना।
  3. सारा पैसा स्टॉक में लगा देना और नकदी हाथ में न रखना।
  4. रोज़ के छोटे खर्चों को नजरअंदाज करना।
  5. Fixed खर्चों की पहले से प्लानिंग न करना।
  6. Personal और Business पैसे को आपस में मिला देना।
  7. उधार की कोई सीमा तय न करना।
  8. Cash Flow का रोज़ हिसाब न रखना।
  9. Emergency या Buffer Cash न बनाना।
  10. Payment Delay को हल्के में लेना।

दुकानदारों के लिए Simple Cash Flow Discipline (रोज़ के 3 नियम)

नियम 1: रोज़ का Cash हिसाब उसी दिन देखें

हर दुकानदार के लिए यह नियम सबसे जरूरी है कि दिन खत्म होने पर यह ज़रूर देखा जाए कि आज कितना पैसा आया और कितना खर्च हुआ। अगर रोज़ का हिसाब रोज़ नहीं देखा गया, तो छोटी छोटी गड़बड़ियाँ बड़ी बन जाती हैं। एक साधारण कॉपी में रोज़ की बिक्री और खर्च लिखने से यह साफ दिखने लगता है कि पैसा कहाँ जा रहा है। रोज़ का हिसाब देखने से Cash Flow पर पकड़ बनी रहती है और महीने के आखिर में झटका नहीं लगता।

नियम 2: जो पैसा आज आना चाहिए, उसे आज ही लाने की कोशिश करें

कोशिश यह होनी चाहिए कि जो पैसा आज आना चाहिए, वह आज ही आए। उधार देने से पहले साफ बता दें कि भुगतान कब करना है। अगर ग्राहक डिजिटल पेमेंट कर सकता है, तो उसी समय भुगतान लेना बेहतर रहता है। समय पर पैसा आने से रोज़ के खर्च बिना तनाव के निकलते हैं और बिज़नेस की चाल बनी रहती है।

नियम 3: खर्च करने से पहले हाथ की नकदी जरूर देखें

कई बार दुकानदार खर्च करते समय यह नहीं देखते कि हाथ में कितना पैसा बचा है। बस जरूरत या मन देखकर खर्च कर दिया जाता है। यही आदत Cash Flow को कमजोर करती है। कोई भी बड़ा खर्च करने से पहले यह देखें कि उसके बाद भी जरूरी खर्च निकालने के लिए पैसा बचेगा या नहीं। यह छोटी सी आदत बिज़नेस को लंबे समय तक सुरक्षित रखती है।

Conclusion: Cash Flow मजबूत नहीं होगा, तो बिज़नेस कैसे आगे बढ़ेगा?

छोटे बिज़नेस में सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि बिज़नेस सिर्फ मुनाफे से नहीं, बल्कि Cash Flow से चलता है। अगर हाथ में पैसा समय पर नहीं रहेगा, तो अच्छा बिज़नेस भी दबाव में आ सकता है। किराया, सैलरी, बिजली और माल का खर्च हमेशा समय पर आता है, इसलिए Cash Flow संभालना बहुत जरूरी हो जाता है।

इस आर्टिकल में आपने Cash Flow को संभालने के पाँच आसान तरीके समझे। Cash In और Cash Out का संतुलन बनाना, उधार को नियंत्रण में रखना, स्टॉक को समझदारी से रखना, Fixed खर्चों की पहले से प्लानिंग करना और Buffer Cash बनाना। ये सभी तरीके छोटे दुकानदार और नए बिज़नेस के लिए बहुत काम के हैं।

जब Cash Flow मजबूत होता है, तो बिज़नेस में डर कम हो जाता है। अचानक खर्च आने पर घबराहट नहीं होती और फैसले आराम से लिए जा सकते हैं। Cash Flow सही रहने से आप सही समय पर माल खरीद पाते हैं, ग्राहक को बेहतर सेवा दे पाते हैं और धीरे धीरे बिज़नेस को आगे बढ़ा पाते हैं।

याद रखें, बड़ा बिज़नेस बनने से पहले Cash Flow का अनुशासन बनाना जरूरी है। अगर पैसा हाथ में रहेगा, तो बिज़नेस अपने आप रास्ता बना लेगा।

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